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.नीतीश कुमार सिर्फ कुर्सी पुत्र हैं

बीजेपी के साथ चुनाव लड़ा जनादेश लिया और मोदी के मुद्दे पर गठबंधन खत्म राजद के साथ सरकार बनाई फिर .. राजद के साथ चुनाव लड़ा जनादेश लिए और फिर वही मोदी वही पीएम ..पर अब सब भा गया फिर से .. अजब गजब नही लगता आपको यह ...?? जनादेश के वक्त के साथी राजद को छोड़ बीजेपी के साथ सरकार फिर से ..इस राजनीतिक दल की फितरत समझिये ..राजद या बीजेपी अपनी अपनी जगह पर ही हैं ..यह सुशासन कभी इधर कभी उधर होता है ..जिसके साथ चुनाव लड़े उसी को छोड़ देता है फिर बीच मे .. पहचानिये ऐसे राजनीतिक परजीवियों को और उखाड़ फेंकिए इनका तंबू..कोई नैतिकता नही होती इनकी.. ऐसे लोगों की कोई विश्वसनीयता नहीं कहीं ...रोज जिसका ईमान बदले और रोज परिभाषाएं बदले ईमान की जिसकी उसे अवसरवादी और पाखण्डी कहते हैं ..नीतीश कुमार सिर्फ #कुर्सी_पुत्र हैं ..और सिर्फ कुर्सी के हैं और कुर्सी के लिए कुछ भी कर सकने वालों मे से हैं ..! रंजन कुमार x

पारिवारिक तानेबाने का एक अद्भुत सच

पारिवारिक तानेबाने का एक अद्भुत सच पारिवारिक तानेबाने का एक अद्भुत सच बताता हूँ जो अनेक लोगों की समस्याओं को सुनते और उनका समाधान खोजते मुझे मिला है ...परिवार में तीन तरह के लोग होते हैं ...शोषक ,शोषित और तमाशबीन ...परिवार में तभी तक शांति रहती है जबतक शोषित का धैर्य बना रहता है और चुपचाप अपना शोषण होने देता है ...जिस दिन शोषित आवाज उठाएगा परिवार असंतुलित हो बिखरेगा ये तय है ...और फिर होता है नए ढंग से नए समीकरणों में यह आगाज ...शोषण होने देना अपना ज्यादा खतरनाक है क्योंकि ये मन में बाद में कई प्रकार की हीन भावनाएं भरता है नतीजतन आगे जाकर अपराधी मनोवृति बन सकती है ...बेहतर है समय पर शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करें,आज नहीं तो कल विकराल रूप ले ये समस्या आएगी तब समाधान मुश्किल होगा बहुत ...लिहाज में रह शोषकों की बेलगाम दूषित वृति को काबू नहीं कर सकते ...शोषण के खिलाफ मुंहतोड़ जवाब दीजिये ...समाज का स्वरुप बदलेगा ...!!  रंजन कुमार

मै मेरे ख्वाब और बापू का आशीर्वाद

नींद ने जब न आने का प्रण कर लिया ....तब मैंने कल रात निर्णय लिया बापू से मिलने का....और चल पड़ा बापू की समाधि पर.....लम्बी दूरी तय कर जब मै पंहुचा तब भोर होनेवाली ही थी और मैंने पाया की बापू बेचैन से टहल रहे हैं समाधि  से बाहर आकर ..मेरे प्रणाम का भी जवाब कुछ अनमना होकर ही दिया ......मैंने उनसे इस बेचैनी का कारण पूछा तब बापू ने कहा .....सब मेरा नाम ख़राब कर रहे हैं .....जिसे देखो वही मेरे आदर्शो को कफ़न चढ़ा रहा है......मंत्री से लेकर संतरी तक .....अन्ना से ल ेकर केजरीवाल तक ...मैंने कहा....बापू यही नियति है आज की .....और पूछा अभी आप आराम के वक़्त घूम क्यों रहे हो......बापू बोले अभी आ रहा हूँ.....नेहरु से शिकायत करके ...मैंने बहुत पहले ही कहा था लगाम लगाओ इस पर....वरना ये हम सब का नाम डूबाएगी .....पर कहा माना था उसने...... और आज नेहरु की उसी बिटिया ने मेरे नाम को अपने नाम में जोड़ लिया फिरोज से शादी रचा .....नकली गांधी बन गयी और अब उसके खानदान वाले सब मिलकर मेरे आदर्शो का कचूमर निकाल रहे हैं....... वह फिरोज था ...कहाँ का गांधी.......सब एक साजिश था.....और र्मै उसका शिकार हो रहा हूँ...

नजरिया ही ले जाती है हमे आनंद से परमानंद तक

जैसे ही देखने समझने का हमारा नजरिया बदलता है सब नजारे बदल जाते हैं फिर ..और उसकी तो रीत ही यही है जो जिस भाव से उसे भजता है वह उसे उसी रूप मे मिल भी जाता है ..स्थूल से परे ये भावनाओं की दुनिया मे सूक्ष्म जगत के नजारे हैं जिसका आनंद विरले ही ले पाते हैं ..और यही आनंद बढ़ता जाता है पल पल और परमानंद तक ले जाता है .नजरिया ही महत्वपूर्ण है जिन्दगी में जिन्दगी को आगे बढाने के लिए ..सकारात्मक या नकारात्मक जैसी हमारी सोच होगी जैसी हमारा नजरिया होगा हम वैसे ही बनते चले जाते हैं ..याद रखिये ..नजरिया ही हमारी हमे ले जाती है आनंद से परमानंद तक  !!  रंजन कुमार

अजब गजब पाखंड केंद्र की भाजपा सरकार का

एससी एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बेअसर करने के लिए अध्यादेश और राम मन्दिर मुद्दे पर उसी सर्वोच्च न्यायालय मे केस और फैसले का बहाना ..? 370 पर अध्यादेश क्यों नहीं अबतक ..??भाजपा की केंद्र की सरकार की अजब गजब पाखण्ड पूर्ण नीतियां ..कहने को कुछ है नही गुजरे साढ़े चार साल मे किया क्या तो अब छद्म राष्ट्रवाद के बहाने नागरिकता और एन आर सी का मुद्दा दलित प्रेम वगैरह वगैरह ..यह भारतीय जुमला पार्टी ही है अब केवल ..यह अटल आडवाणी वाली भारतीय जनता पार्टी नही है ! रॉबर्ट बढेरा  अबतक खुला घूम रहा ..काला धन आया नही ..नोटबन्दी से क्या मिला देश को यह सिर्फ जेटली सर और मोदी जी को ही पता है जनता को दिखा नही ..भ्रष्टाचार मे आकण्ठ डूबी पिछली कोंग्रेस सरकार के कितने मंत्री जेल गए कितनो पर कार्यवाई हुई कोई बताता नही है ..न खाऊंगा न खाने दूँगा सुनते रहे और बैंको के सफेद धन ले लेकर बड़े बड़े उद्योगपति विदेश भागते रहे ..मेहुल भाई को अभी बीते नवम्बर मे क्लीन चिट देनेवाली यही सरकार अब उसके प्रत्यर्पण का नाटक करते भी दिखेगी चुनावो तक ..रोजगार खूब मिलेगा की उम्मीद लगाए करोड़ो शिक्षित बेरोजगारों को रोजगा...