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परम्परागत सवर्ण वोटरों को धोखा दिया है इस सरकार ने

  हिन्दू और हिन्दू भावनाओ के साथ जो छल इस सरकार ने किया है अब परिणाम अवश्य मिलेगा इसका ..राम मन्दिर के लिए न्यायालय का इंतजार और एस सी एस टी एक्ट मे न्यायालय के फैसले पर अध्यादेश ..परम्परागत सवर्ण वोटरों को धोखा दिया है इस सरकार ने ..नाकामी छुपाने के लिए  4 साल की देश को मुद्दों से भटकाने की कोशिश थी यह पर उल्टा पड़ गया दांव ..न अटल जी की गठबंधन सरकार राम मन्दिर बनवा पायी तब क्योंकि बहुमत न होने की विवशता थी न मोदी की प्रचण्ड बहुमत की सरकार ही कर पायी जो कहीं से विवश नही....न राम से इन्हें प्यार है न हिन्दू से .सब केवल जुमला और वोट की नौटंकी है ...होता तो अध्यादेश राम मन्दिर पर आता और महबूबा मुफ्ती के साथ ये सरकार न चलाये होते 35 A हट चुका होता ..यह अब भारी पड़नेवाला है ..लोग जगने लगे हैं ..

नेता कोई भी देश के लिए नहीं सोचता केवल कुर्सी के लिए जीता है

2004 याद है न ..शाइनिंग इंडिया के वहम में ऐसे ही बेलगाम हो नंगा नाचने लगे थे बीजेपी वाले सत्ता मद में ..लेकिन तब राहत की बात यह थी कि अटल जी पीएम थे जिनका व्यक्तित्व शालीन था ..फिर भी जनता ने सत्ता मद मे धुत उनके मंत्रियों के बड़बोलेपन को सबक सिखाया था .आज न वो बीजेपी है न वो संस्कार हैं इनके न वो शालीनता ही है कहीं किसी मे ..और सत्ता मद मे इतने अंधे हो चुके हैं की शाहबानो प्रकरण मे राजीव गांधी की एतिहासिक भूल को इन्होंने फिर दुहरा दिया है SC ST अध्यादेश द्वारा सुप्रीम कोर्ट क े निर्णय को पलट के ..सवर्णों ने हुकांर भर दी है ..इशारा दे दिया है कल के आंदोलन से ..अब भी नही जगे तो ..काल चक्र निर्णय दे देगा और अटल जी की तरह मोदी जी भी इतिहास हो जाएंगे ..बहुत कुछ करने का अवसर था प्रचंड बहुमत दिया लोगो ने मगर चन्द वोटॉ की भूख ने तुष्टिकरण का ऐसा जाल बुना खुद बीजेपी ने अपने लिए जिसमे अब खुद ही उलझ के खत्म हो जाएगी ..बड़ा अवसर बेकार गया और मोदी जी ने एक बड़ी चूक कर दी है अब ..सुधार लिया तो ठीक वरना शाइनिंग इंडिया दुहराया जाएगा कोई शक नहीं ..रंजन कुमार 07.09.18

दिशाहीन हो गयी BJP.

समाज को जाति गत आंदोलन की ओर सरकार ने ही धकेला है वरना क्या जरूरत थी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद इस एक्ट मे टांग घुसेड़ने की ..? देशहित के कितने काम हो सकते थे मगर सरकार जी व्यस्त है जुमलेबाजी मे केवल ..दिल की बात बताऊँ तो मोदी जी के भाषणों से अब उब होने लगा है ..केवल कोरे शब्द थोथे आश्वासन और न नीति न नीयत कार्यान्वयन की ..नीयत होती तो पकौड़े बेचने की सलाह नही देनी पड़ती ..तो क्या गलती से चुन लिया मोदी को पीएम लोगो ने ..?? शायद ..सही है ये ..चाय वाले को पीएम बनाया तो वह पढ़े  लिखे बेरीजगारो को पकौड़ा बेचने की ही सलाह देगा ..क्या यह सोच पर प्रश्न चिन्ह नही लगाता पीएम के ..?? चाय बेचने वाली मानसिकता मे पकौड़ा ही अभी तक हावी है ..स्वरोजगार मे भी उससे ऊपर सोच नही गयी जिसकी उसके हाथ मे क्या है भविष्य देश का ..??और इनसे लोग उम्मीद लगाये बैठे हैं विश्व गुरु बनेगा भारत...मन की बात सुनाने वाले हर महीने प्रेस कॉन्फ्रेंस मे नही बैठे कभी जनता के सवाल सुनने और जवाब देने ..?? इंटरवियु भी गिने चुने ही दिए ..क्यो डर है चौकीदार को सवालों से ..?? नोट बन्दी से काला धन आया या कैशलेस हुआ इंडिया ..? यूप...