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जून, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चरित्रहीनता ऐसा दुर्गुण जो कभी भी माफ़ करने लायक नहीं ...

हर गलती की माफ़ी हो सकती है पर मेरी नजर में चरित्रहीनता ऐसा दुर्गुण है जो कभी भी माफ़ करने लायक नहीं ...जो एक बार मेरी नजर से गिरता है इस दुर्गुण के कारण उसे मैंने कभी दूसरा अवसर कुछ कहने का नहीं दिया है,उससे पहले नजदीकी कितनी भी रही हो .. मुझे उसमे फिर कुत्ते दिखने लगते है जिन्हें पैदा होने के अगले साल तक में माँ बहन की शक्लें भी याद नहीं रहती , सिर्फ वासना याद रह जाता है ! अक्सर देखता हूँ महिलाओं की नियति है बार बार अपने चरित्रहीन पुरुष को माफ़ करना ..एड्स के लिए काम करनेवाले  NGO के आंकड़े देखता हूँ तो पता चलता है ९०% तक महिलाओं को ये बीमारी अपने चरित्रहीन पतिओं से मिली है और उन्हें मालूम था पति गलत करता है पर माफ़ी मांगी तो माफ़ कर दिया ..समाधान क्या है फिर ये सोचना सामाजिक विचारकों का कार्य है लेकिन एक विचार जो मुझे आता है कि बहनों ऐसे पतिओं को माफ़ मत करो ..उसके अंदर के पुरुषत्व को घायल करो माफ़ करने के बजाय...उसके सामने शर्त रख दो जो तुमने किया है वही अब मैं भी कर लूँ ...फिर दोनों एक दुसरे को माफ़ करने की सोचेंगे ...अगर ये हौसला दिखाया तो घायल पुरुषत्व कभी फिर दुबारा गलत सोचेगा भी...

सरकारें सब की सब ढकोसलावादी होती हैं मानवतावादी नही

सरकारें सब की सब ढकोसलावादी होती हैं मानवतावादी नही ..यत्र तत्र सर्वत्र पाखण्ड-राज है ..गुंडे भी इन्हीं के पुलिस भी इन्हीं की और बहुत हदतक बिकाऊ मीडिया भी इन्हीं की ..जो रास्ते मे आएगा वह किनारे कर दिया जाएगा ..कौन सुननेवाला है और किसे फिक्र है आम लोगों की ..? हां जंगलराज मे फोटो सेशन के वक्त ये सरकारें कभी कभी अच्छा भाषण दे देती हैं गलती से उसे सुशासन समझ लिया जाता है.. क्योंकि बिकाऊ मीडिया यही काँव कांव भर देती है कानों मे..मीडिया और सत्ता का गठजोड़ न्याय के हर रास्ते को बंद कर देता है ..यह इस दौर की सबसे भयावह और स्याह सच्चाई है ! रंजन कुमार

व्हाट्स अप्प के फायदे

लड़ने के लिए सबसे उपयुक्त साधन है  आज के दौर मे व्हाट्स एप्प.. स्टेट्स डाल के  डीपी बदल के  कभी डीपी दिखा के  तो कभी डीपी छुपा के,  कभी लास्ट सीन छुपा के तो कभी लास्ट सीन दिखा के .. और न निपटारा हो फिर भी तो डाइरेक्ट चैट मे .. सर्वथा उपयुक्त साधन सम्पन्न स्थान व्हाट्स अप्प लड़ाई झगड़े के लिए बिना कोई हिंसा किये कइ कई दिन ही नहीं कई महीनो तक लड़ सकते हैं तो जमकर फायदा उठाइये ...!!  रंजन कुमार

निष्ठुर आंधियों

बेचारे रूठे बादल  आये भी तो  साजिशन , मनहूस आन्धिओं ने  उन्हें भगा दिया ..! एक दो बूंद  बरस भी जाते , तो हवाओं  तेरा क्या बिगड़ जाता ? क्या पता , किसी बिरहन के लिए  कोई सन्देश हो ? किसी प्रेम पिपासु के लिए  प्रेमिका का आमन्त्रण हो  इन बादलों मे .. निष्ठुर आंधियों  कभी  प्रेम भी  किया है तुमने किसी से  या सब उड़ा देंना ही  केवल जानी आजतक ..??  # मेघदूतम   # कालीदास  पढ़ते हुए के ख्याल आंधियों और बारिशो पर ...!! रंजन कुमार

लग हौ न की जएतो भैसिया अबकी पानी में

नेहरू इंदिरा और कोंग्रेस की कमियां गिनवा के वोट कबतक लेंगे साहब ? रॉबर्ट बडेरा अभी भी कानूनी शिकंजे से बाहर है,काश्मीर समस्या की जिम्मेदार तब आपने कहा था दिल्ली की सरकार है तो अब कौन है सर दिल्ली मे भी आप थे और वहां भी ..370 नही हटा राम मन्दिर मुद्दा नही सुलझा काला धन नही आया बेरोजगारी नही कमी और भ्रष्ट कोंग्रेस के कितने मंत्री अबतक जेल गए 4 साल के आपके शासन मे इसका हिसाब दीजिये हुजूर जो 2014 मे मुद्दे थे ..!! आपातकाल की बरसी मना रहे 2018 मे ..आपातकाल के कारण ही कोंग्रेस अपने अंजाम को प्राप्त हुई थी जनता ने जवाब दे दिया था .. रंजन कुमार

बीजेपी के अंदर ही भीतरघात का बड़ा खतरा ..एक विश्लेष्ण

सर अरुण जेटली जैसे सर्वथा अयोग्य और मोदी लहर में भी सुरक्षित सीट चुनने के बाद भी सांसद तक न बन पाने वाले को वित्त मंत्री और सुषमा स्वराज जैसे सेकुलर नेता को विदेश मंत्री बनाकर मोदी जी ने खुद वापस चाय की केतली थामने की सम्भावना पैदा कर दी है ! इनके कारनामे अगर 2019 के परिणाम को इंडिया शाइनिंग की तरह दुहरवा दें तो आश्चर्य नही होना चाहिए कुछ .. याद रहे यही दोनो पिछले दस सालों मे लोकसभा राज्यसभा मे विपक्ष के नेता थे जब कोंग्रेस की तथाकथित भ्रष्ट सरकर सत्तासीन थी और ये कुछ नही कर  पाते थे उस सरकार के खिलाफ ..जबकि 44 सीट वाली कोंग्रेस भी आज इनको काम नही करने देती संसद मे इतना शोर करती है .. एक सच यह भी है की इन्ही दोनो की अयोग्यता के कारण मोदी जी राष्ट्रीय राजनीति मे बीजेपी के पीएम उम्मीदवार बनके आये तो इनके मन मे अंदर अंदर मोदी की जमीन खिसकाने की भी गुप्त इच्छा कुलबुला रही हो ..यह संभावना तो बनती ही है .. अर्थनीति देश की और अब पासपोर्ट तुष्टिकरण देख इन आशंकाओ को बल भी मिलता ही है..! वैसे भी मोदी को अभी विपक्ष नही हरा सकता ये अपने ही भीतरघात करेंगे पूरी संभावना है ..! राजन...

कभी गधा भी बाप , और बाप भी गधा !

चापलूसों और स्वार्थी लोगों के लिए कोई रिश्ता नही होता .. जरूरत पड़ने पर गदहे को बाप और बाप को गधा कहने मे पल भर की भी देर नही करते .. जिस सीढ़ी को पकड़ ऊपर चढ़ना सीखा ऊपर पहुंचते ही उसे ही लात मार गिराना इनका पहला काम होता है और जिस थाली मे खाई उसमे छेद करना इनकी फितरत .. खुद के फायदे के सिवा किसी और की कभी ये लोग सोचते नही .. नया दिन फिर नई कोई सीढ़ी नए बाप नई थाली ..!!  रंजन कुमार बरेली , उत्तरप्रदेश 

पितृ दिवस पर विशेष !

मैंने कुछ लिखने के लिए जैसे ही लैपटॉप खोला मेरे विचारों पर कर्ण ने कब्ज़ा कर लिया,कहने लगा आज फिर मुझपर कुछ लिखो ! मैंने कर्ण से पूछ लिया आज पितृ दिवस है .. मतलब की फादर्स डे ! क्या आपने अपने पिता को विश किया सभी कर रहे हैं फेसबुक और ट्विटर पर ! कर्ण ने तुरंत पूछा अर्जुन ने कर दिया क्या ? मैंने फिर कहा अर्जुन की पोस्ट तो मैं बाद में देखूँगा आप तो कर दीजिये ! उन्होंने मुझे अधिकृत कर दिया उनके जैविक पिता को फादर्स डे विश करने हेतु कुछ पोस्ट कर देने के लिए .. और अर्जुन की पोस्ट उन्होंने कहा है रात को बताना अर्जुन ने कैसे विश किया है और पाण्डु को किया है या इंद्र को या दोनों ही को यह भी पता करके रखना, और वह चल दिए अपने पालनकर्ता पिता को फादर्स डे की शुभकामनायें देने .. अब अर्जुन की पोस्ट देखूं फादर्स डे पर .. और कर्ण के जैविक पिता सूर्य को फादर डे की शुभकामनाएं देने गया तो सूर्य शरमा के बादलों मे जा छिपा है धुल के गुबार के पीछे, शर्मिंदा सा है सूरज, छुपा हुआ ..!! रंजन कुमार बरेली , उत्तर प्रदेश

डूब मरो पुनपुन के चुल्लू भर पानी में

पुनपुन नदी की सूखी रेत मे चुल्लू भर पानी ढूंढ रेत मे नाक रगड़ के जा के डूब मरो महापुरुषों .. कुछ पुण्य होगा तुम सबको .. एक बर्बर दहेज हत्या के आरोपियों को बचाने मे दिन रात एक किये थे .. सारी ताकत झोंक दी .. मेरी न बहन है न बेटी .. फिर भी मेरा रोम रोम सिहर उठा था वो दारुण गाथा सुन के .. कमीनों तुम सबकी बहन भी है और बेटी भी .. फिर भी उसके लिए दिल मे मोह नहीं उतरा .. वह भी तो किसी की बेटी थी बहन थी आखिर .. जान के भी की उसकी बर्बर हत्या हुई है हत्यारे की मदद की दिन रात .. और जिस घर मे अपनी बेटी ब्याहने जा रहा उसी घर मे हुई दहेज हत्या के हत्यारे को जो दिन रात बचाने मे लगता है सेटिंग कर के दलाली खाने मे .. उससे बड़ा सूअर और दोगला इस धरती पर दूसरा हो ही नही सकता कोई .. माँ जगदम्बे से दोनो हाथ उठा उस बेबस बहन के हिस्से के न्याय को मांगता हूँ ...न्याय की आवाज मै उठाता रहूँगा,सत्य न्याय की पुकार पर बार बार निकलता रहूँगा मै हर कदम ..देखूं तुम सबको भी जरा,..सत्य की आवाज उठाने के लिए मेरी हत्या की धमकी देने वालों ..मेरी आवाज आज भी बुलंद है ,और बुलंद रहेगी ..तुम्हारी इज्जत की धज्जियां उड़ा के रख द...

भाग्य से सांढ !

कुछ पुरुषों का भाग्य जाने कौन सी कलम से लिखता है विधाता .. पूरी जिंदगी कुछ नहीं करते सिर्फ बड़ी बड़ी बातें करते हैं और रोज नए सपने देखते ओर दिखाते हैं .. बचपन मे माँ बाप पालन करते हैं जवानी मे कमाऊ बीबी पालन करेगी और बुढ़ापे मे फिर औलाद .. उनका काम सिर्फ जीवन भर डींगे हांकना है की मैँ भी किसी नवाब का नाती हूँ और दो सौ एकड़ मे पुदीने की खेती होती है अभी भी मेरे घर .. खुद के अंदर का छिपा इंफेरीओरीटी कॉम्पलेक्स यानी हीन भावना जब ज्यादा तंग करे तब जिस बीबी की कमाई पर पलते हैं उसे ही खरी  खोटी सुना के फिर वो मर्दानगी साबित करने लग जाते है .. जिस मर्दानगी के लिए हकीम की गोली सुबह शाम लेने पर भी अपने प्रयास मे नाकाम रहें .. वियाग्रा की गोली के लिए भी पैसे मांगने जो बीबी से जाते हैं .. और शाम की चाय के लिए भी बीबी की कमाई पर निर्भर हों .. ऐसे पुरुषो .. नहीं !  महापुरुषों को अपने इर्द-गिर्द भाषणबाजी करते पाता हूँ तो फिर विवश हो सोचता हूँ .. किस कलम से लिखा था विधाता ने इसकी तकदीर .. और गैरत नाम की कोई चीज रखना ही शायद भूल गए .. बेशर्मी की पराकाष्ठा देखनी हो तो बीबी की कमाई पर पल रहे किस...

बिहार में घर - घर में एक दो मुन्ना भाई !

बिहार से हूँ मैँ भी तो वहां की एक समस्या बताता हूँ .. लगभग हर घर मे एक दो मुन्ना भाई हैं वहां 420 की धारा मे जाने वाले .. फर्जी डिग्री धारक .. इन मुन्ना भाइयों की समस्या ये है की पहली बार पढ़ते वक़्त ये एम ए .. पी एच डी .. एल एल बी .. सब कर के बैठ गए और कहीं नौकरी मिली नहीं उम्र गुजर गयी .. अब नौकरी क्यों नहीं मिली ये दूसरी समस्या है .. ये लोग पढ़ते वक़्त स्कूल मे न हो के कंचा खेलते थे महारथी या लौंडिया बाजी करते थे .. मास्टर साहब को नकद दे ले के या सामान उनके घर रखवा के हाइ स्कूल पा स किये पर जानकारी नगण्य है .. मैट्रिक और इंटर मे बिहार टॉप कैसे होता है ये तो अभी ताजा ताजा है ही .. सब जानते हैं .. ऐसे ही जुगाड़ से सारा हाई एजुकेसन ले तो लिए ..आता कुछ नही तो कहीं सेलेक्ट भी न हुए फिर ...वैसे बिहार से ही अधिकतर प्रतिभाएं आई.ए.एस करती हैं ज्यादा ..पर अभी इन मुन्ना भाई लोगो की बात कर रहे हैं .. अब ये भाई लोग क्या करें जब कुछ मिला भी नहीं और डिग्री का पुलिंदा भी है साथ साथ .. कुछ और धंधा करेंगे नहीं डिग्री का घमंड जोर मार रहा है जिसे जैसे तैसे जोड़ा है अपने साथ ..तो फिर ये लोग नाम और जन्म ...