मै मेरे ख्वाब और बापू का आशीर्वाद
नींद ने जब न आने का प्रण कर लिया ....तब मैंने कल रात निर्णय लिया बापू से मिलने का....और चल पड़ा बापू की समाधि पर.....लम्बी दूरी तय कर जब मै पंहुचा तब भोर होनेवाली ही थी और मैंने पाया की बापू बेचैन से टहल रहे हैं समाधि से बाहर आकर ..मेरे प्रणाम का भी जवाब कुछ अनमना होकर ही दिया ......मैंने उनसे इस बेचैनी का कारण पूछा तब बापू ने कहा .....सब मेरा नाम ख़राब कर रहे हैं .....जिसे देखो वही मेरे आदर्शो को कफ़न चढ़ा रहा है......मंत्री से लेकर संतरी तक .....अन्ना से लेकर केजरीवाल तक ...मैंने कहा....बापू यही नियति है आज की .....और पूछा अभी आप आराम के वक़्त घूम क्यों रहे हो......बापू बोले अभी आ रहा हूँ.....नेहरु से शिकायत करके ...मैंने बहुत पहले ही कहा था लगाम लगाओ इस पर....वरना ये हम सब का नाम डूबाएगी .....पर कहा माना था उसने...... और आज नेहरु की उसी बिटिया ने मेरे नाम को अपने नाम में जोड़ लिया फिरोज से शादी रचा .....नकली गांधी बन गयी और अब उसके खानदान वाले सब मिलकर मेरे आदर्शो का कचूमर निकाल रहे हैं....... वह फिरोज था ...कहाँ का गांधी.......सब एक साजिश था.....और र्मै उसका शिकार हो रहा हूँ......मै हमदर्दी के साथ बापू को सुन रहा था .....क्या कहता.....कुछ था ही नहीं कहने को......! बापू ने पूछा तू क्या लेने आया मेरे पास ये बता.......मैंने तब अपने पत्ते खोले....बापू मुझे भी राजनीति में आना है और मै अन्ना की तरह गोल गोल घूमकर नहीं आना चाहता ..... नाटक अपने से होगा नहीं...सीधे तुम्हारे पास आ गया आशीर्वाद और गुरुमंत्र लेने.....सफल हो जाऊं यह आशीर्वाद दो ......बापू ने आशीर्वाद दिया और कहा परम प्रसन्न हुआ .....कम से कम तुम सच तो कह गए ....इतनी नैतिकता तो है तुम्हारे अन्दर .....वरना घंटो यहाँ बैठकर लोग दिखावा ही कर जाते हैं......सच नहीं कहते ......तुम्हे मेरा आशीर्वाद है ....और गुरुमंत्र ये है पुत्र......नाम में गांधी जोड़ लो......सब जोड़ते हैं....दिन रात मेरी खिल्ली उड़ाते हैं.....तुम भी यह कर डालो ..... दूसरा मंत्र है.....कही विदेश जाओ ....हो सके तो इटली जाना .....और कोई मेम व्याह लाना.....उसे भी गांधी का तमगा दे देना......इटली वाली आजमाई हुई है....धोखा नहीं होगा.......तीसरा मंत्र है कांग्रेस में शामिल हो जाना......फिर तुम क्या तुम्हारी सात पुश्ते राजनीति में सफल होंगी ......चाटुकारिता में इस पार्टी का कोई जवाब नहीं.....तुम्हे कुछ हो भी जायेगा तो तुम्हारी विदेशी मेम .....और उनके बच्चो को भी सत्ता की गारंटी ......मैंने दंडवत प्रणाम किया और लौट आया घर ख़ुशी ख़ुशी मन्त्र ले कर यह .. बस यह आप से शेयर कर रहा हूं......किसी को नहीं कहिएगा मेरा यह गुप्त मिशन है.....बस आप के मेरे बीच की बात है यह.......
रंजन कुमार ....
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