भाग्य से सांढ !
कुछ पुरुषों का भाग्य जाने कौन सी कलम से लिखता है विधाता .. पूरी जिंदगी कुछ नहीं करते सिर्फ बड़ी बड़ी बातें करते हैं और रोज नए सपने देखते ओर दिखाते हैं .. बचपन मे माँ बाप पालन करते हैं जवानी मे कमाऊ बीबी पालन करेगी और बुढ़ापे मे फिर औलाद .. उनका काम सिर्फ जीवन भर डींगे हांकना है की मैँ भी किसी नवाब का नाती हूँ और दो सौ एकड़ मे पुदीने की खेती होती है अभी भी मेरे घर .. खुद के अंदर का छिपा इंफेरीओरीटी कॉम्पलेक्स यानी हीन भावना जब ज्यादा तंग करे तब जिस बीबी की कमाई पर पलते हैं उसे ही खरी खोटी सुना के फिर वो मर्दानगी साबित करने लग जाते है .. जिस मर्दानगी के लिए हकीम की गोली सुबह शाम लेने पर भी अपने प्रयास मे नाकाम रहें .. वियाग्रा की गोली के लिए भी पैसे मांगने जो बीबी से जाते हैं .. और शाम की चाय के लिए भी बीबी की कमाई पर निर्भर हों .. ऐसे पुरुषो .. नहीं ! महापुरुषों को अपने इर्द-गिर्द भाषणबाजी करते पाता हूँ तो फिर विवश हो सोचता हूँ .. किस कलम से लिखा था विधाता ने इसकी तकदीर .. और गैरत नाम की कोई चीज रखना ही शायद भूल गए .. बेशर्मी की पराकाष्ठा देखनी हो तो बीबी की कमाई पर पल रहे किसी भाषण बाज को देख लीजिये .. अद्भुत रचना होता है वह भी प्रभु की ..!!
रंजन कुमार ,
बरेली , उत्तर प्रदेश
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