बीजेपी के अंदर ही भीतरघात का बड़ा खतरा ..एक विश्लेष्ण

सर अरुण जेटली जैसे सर्वथा अयोग्य और मोदी लहर में भी सुरक्षित सीट चुनने के बाद भी सांसद तक न बन पाने वाले को वित्त मंत्री और सुषमा स्वराज जैसे सेकुलर नेता को विदेश मंत्री बनाकर मोदी जी ने खुद वापस चाय की केतली थामने की सम्भावना पैदा कर दी है ! इनके कारनामे अगर 2019 के परिणाम को इंडिया शाइनिंग की तरह दुहरवा दें तो आश्चर्य नही होना चाहिए कुछ ..

याद रहे यही दोनो पिछले दस सालों मे लोकसभा राज्यसभा मे विपक्ष के नेता थे जब कोंग्रेस की तथाकथित भ्रष्ट सरकर सत्तासीन थी और ये कुछ नही कर पाते थे उस सरकार के खिलाफ ..जबकि 44 सीट वाली कोंग्रेस भी आज इनको काम नही करने देती संसद मे इतना शोर करती है ..

एक सच यह भी है की इन्ही दोनो की अयोग्यता के कारण मोदी जी राष्ट्रीय राजनीति मे बीजेपी के पीएम उम्मीदवार बनके आये तो इनके मन मे अंदर अंदर मोदी की जमीन खिसकाने की भी गुप्त इच्छा कुलबुला रही हो ..यह संभावना तो बनती ही है ..

अर्थनीति देश की और अब पासपोर्ट तुष्टिकरण देख इन आशंकाओ को बल भी मिलता ही है..! वैसे भी मोदी को अभी विपक्ष नही हरा सकता ये अपने ही भीतरघात करेंगे पूरी संभावना है ..! राजनीति के बदलते पैतरों के बीच जुमलो की लहलहाती खेती देखिए और पकौड़े बेच स्वरोजगार करते हुए मोदी सरकार के महान अर्थशास्त्री जेटली जी को नमन करते रहिये..तो वहीं एक हेमराज के सर के बदले दस पाकिस्तानी सैनिकों के सर ले आने वाली सुषमा मैडम का यह धार्मिक तुष्टिकरण का भी गवाह बनिए .जो धर्म का कार्ड खेलने वाली तन्वी अनस सिद्दकी को तन्वी सेठ नाम का पासपोर्ट एक घंटे में दिलवा देती हैं सिर्फ इसलिए की वह हिन्दू से कनवर्टेड मुस्लिम है और यह मदद उसकी वोट बैंक खींच सकती है उनकी नजर में ...

जुमलों की खेती लहलहा रही है और आपके पास फिलहाल कोई विकल्प नहीं है ..पर क्या वही जज्बा है अब फिर मोदी को लाने का जो 2014 में था ..? एक बड़े वर्ग का जवाब यही है कि वह मोदी सरकार से निराश हुए ..क्यों यह निराशा बढ़ रही है मंथन का विषय है बीजेपी के लिए ...सपने बेच कर केवल राजनीति तो कर सकते हैं पर जननेता नहीं बन सकते ..मोदी जननेता बनने की राह पर तो थे पर भटक गए अब पथ ..रामजी ही इन सबको सद्बुद्धि देवें ..!!


- रंजन कुमार

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