निष्ठुर आंधियों
बेचारे रूठे बादल
आये भी तो
साजिशन ,
मनहूस आन्धिओं ने
उन्हें भगा दिया ..!
एक दो बूंद
बरस भी जाते ,
तो हवाओं
तेरा क्या बिगड़ जाता ?
क्या पता ,
किसी बिरहन के लिए
कोई सन्देश हो ?
किसी प्रेम पिपासु के लिए
प्रेमिका का आमन्त्रण हो
इन बादलों मे ..
निष्ठुर आंधियों
कभी प्रेम भी
किया है तुमने किसी से
या सब उड़ा देंना ही
केवल जानी आजतक ..??
आये भी तो
साजिशन ,
मनहूस आन्धिओं ने
उन्हें भगा दिया ..!
एक दो बूंद
बरस भी जाते ,
तो हवाओं
तेरा क्या बिगड़ जाता ?
क्या पता ,
किसी बिरहन के लिए
कोई सन्देश हो ?
किसी प्रेम पिपासु के लिए
प्रेमिका का आमन्त्रण हो
इन बादलों मे ..
निष्ठुर आंधियों
कभी प्रेम भी
किया है तुमने किसी से
या सब उड़ा देंना ही
केवल जानी आजतक ..??
रंजन कुमार
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